अनूपपुर में रेत ठेकेदार का दुस्साहस, नदी की जलधारा रोककर बनाई अवैध सड़क
अनूपपुर (बिलाल अहमद )
अनूपपुर में रेत ठेकेदार का दुस्साहस, नदी की जलधारा रोककर बनाई अवैध सड़क
मूकदर्शक बना प्रशासन, एसडीएम की नदी के बीच सड़कपर मौजूदगी के बाद भी कार्रवाई शून्य- वीडियो भी जमकर हुआ था वायरस
हाई कोर्ट का चला सख्त चाबुक, राज्य सरकार और प्रशासन से मांगा जवाब
इंट्रो :-अनूपपुर जिले में रेत सिंडिकेट का दुस्साहस अपने चरम पर है, जहां पर्यावरण और नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रेत ठेकेदार 'एसोसिएट कॉमर्स' ने अपनी तिजोरी भरने की अंधी हवस में सीधा नदी की मुख्य जलधारा को ही रोक दिया है। इस कृत्य ने प्राकृतिक जलस्रोतों के अस्तित्व पर ही गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि स्थानीय प्रशासन इस पूरे मामले में आंखें मूंदे बैठा है। माफियाओं के इस बेलगाम आतंक और प्रशासन की मिलीभगत पर अब जबलपुर हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए जवाब तलब किया है।
अनूपपुर :- जिले में बेखौफ रेत ठेकेदार ने अवैध खनन और रेत के भारी परिवहन को सुगम बनाने के लिए बीच नदी की धार को रोककर एक अवैध सड़क का निर्माण कर डाला है। यह पर्यावरण नियमों का खुला उल्लंघन है, जिसे प्रशासन मूकदर्शक बनकर देख रहा है। एसडीएम कोतमा खुद इस अवैध सड़क पर खड़े पाए गए और उन्होंने इसे गलत भी बताया, लेकिन ठेकेदार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली और रेत माफियाओं के साथ उनकी कथित मिलीभगत पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है, जिससे जनता में भी भारी आक्रोश है।
हाई कोर्ट में गूंजा माफियाराज का मुद्दा
प्रशासन की इस गहरी नींद और रेत माफियाओं की मनमानी के खिलाफ जबलपुर हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया गया है। याचिकाकर्ता प्रकाश सिंह परिहार द्वारा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रहमेंन्द्र प्रसाद पाठक ने अदालत के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि किस तरह ठेकेदार नियमों को ताक पर रखकर प्राकृतिक संपदा का दोहन कर रहे हैं और प्रशासन उन्हें अघोषित संरक्षण दे रहा है।
जलधारा रोकने पर अदालत का सख्त रुख
दिनांक 03 जून 2026 को माननीय उच्च न्यालय जबलपुर की युगल पीठ ने इस गंभीर मामले पर सुनवाई की। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से राज्य सरकार से पूछा है कि क्या प्रतिवादी क्रमांक 8 (रेत ठेकेदार) द्वारा किए जा रहे खनन कार्य से पानी का बहाव बाधित हो रहा है। अदालत ने इसे पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदेह मानते हुए अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट का यह सख्त रुख स्पष्ट संकेत दे रहा है कि अब नदी की धार रोकने वाले रसूखदारों को बख्शा नहीं जाएगा।
रेत भंडारण नियमों की अनदेखी पर भी सवाल
अदालत ने केवल अवैध सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि रेत के भंडारण (Sand Storage) से जुड़े नियमों के घोर उल्लंघन को लेकर भी राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्हें कहा गया है कि वे इन दोनों गंभीर बिंदुओं पर जिला प्रशासन वस्तु स्थिति प्राप्त कर अदालत को अवगत कराएं। इससे साफ है कि अदालत अब रेत माफियाओं के पूरे सिंडिकेट और उनकी कार्यप्रणाली की बारीकी से जांच कर रही है।
22 जून को होगी प्रशासन की जवाबदेही तय
हाई कोर्ट ने प्रशासन की जवाबदेही तय करने के लिए समय-सीमा निर्धारित कर दी है और मुख्य मामले की गंभीरता देखते हुए अंतरिम आवेदन बंद कर दिए हैं। न्यायालय के आदेशानुसार, अब इस जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 22 जून 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध की गई है। इसी सप्ताह सरकारी वकील को प्रशासन की विस्तृत रिपोर्ट अदालत के पटल पर रखनी होगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नदी को छलनी करने वालों पर क्या कानूनी गाज गिरती है।
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